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गुरुवार, 9 सितंबर 2010

" ये है मेरा हिन्दुस्तान "

( पूर्व मुख्य सतर्कता आयुक्त का कहना है कि हर तीसरा हिन्दुस्तानी भ्रष्ट है | निश्चित रूप से यह तीसरा हिन्दुस्तानी हम में से वह है,जिस पर देश के हित-सम्पादन की ज़िम्मेदारी है | )

बस्ती-बस्ती रैन-अन्धेरे,
गलियाँ जैसे भूतों के डेरे ,
जिन पे मुल्क टिका है यारो,
वे हैं भ्रष्टाचार की खान,
                                ये है मेरा हिन्दुस्तान |

पूछ रही है देश की माटी,
 मेरे लाल कहाँ हैं खोये,
मेरी अस्मत ख़ातिर लुट गये,
ऐसे लाल क्यूँ आज न होये,
ये हैं कैसे लाल जो बेचें,
चौराहों पर मेरा मान,
                              ये है मेरा हिन्दुस्तान |

नीम बेहोशी हम हैं सोये,
देश की चिंता कौन करेगा ?
लूट मची है घर भरने को,
कौन देश के कष्ट हारेगा ?
कौन बुझाए नक्सल की आग ?
किस को है कश्मीर का ध्यान ?
                               ये है मेरा हिन्दुस्तान | |
                       

             (रचना-तिथि:---30-12-1999)



3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति।

    हिन्दी, भाषा के रूप में एक सामाजिक संस्था है, संस्कृति के रूप में सामाजिक प्रतीक और साहित्य के रूप में एक जातीय परंपरा है।

    हिन्दी का विस्तार-मशीनी अनुवाद प्रक्रिया, राजभाषा हिन्दी पर रेखा श्रीवास्तव की प्रस्तुति, पधारें

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  2. ११ साल लिखी पहले कि कविता आज भी प्रासंगिक है ...यह है हिन्दुस्तान

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