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शुक्रवार, 17 सितंबर 2010

" हिन्दुस्तान ज़िन्दाबाद "

(कारगिल के शहीदों को प्रणाम)

सुनो !
वे चले गये पहाड़ों पर,
के हम, 
रह सकें बेखौफ़,
मैदानों में |
दफ़न हो गये कुछ सपने,
बर्फ में,
के ज़िन्दा रह सकें,
हमारे सपने |
उन्होंने झेल लीं,
गोलियाँ सीने पर अपने
के हम कर सकें,
विजय-तिलक,
माँ के माथे पर |
खामोश हो गयीं,
कुछ आवाज़ें,
के ज़िंदा रह सकें,
हमारी आवाज़ें |
वे दे गये,
कई आँखों को आँसू,
के न बाहें कभी,
हमारी आँखों से आँसू |
आओ !
उन के बलिदानों को रक्खें कामयाब,
सर झुकाएँ,
उन के खून के आगे,
मिलाएँ---
एक सुर में आवाज़,
और कहें---
              " हिन्दुस्तान जिंदाबाद | "


(रचना-तिथि:---10-07-1999)

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